Wednesday, 13 August 2014

चोका प्रतियोगिता में पुरस्कृत रचनाएं

सुना आपने
एक राज की बात,
गई गुलामी,
अब अच्छे हालात!
बीत चुकी है,
कालिख वाली रात!
देखो नभ को,
तारों जड़ी परात!
है, आजादी में,
खुशियों की सौगात!
झूमीं फ़सलें,
ऐसी है बरसात!
युद्ध व जीत,
हम सबकी जात!
थामो कलम,
स्याही भरी दवात!
लिख दो सारे,
है जो दिल की बात!
विश्व पटल
सबसे मुलाकात!
नभ से ऊँची,
भारत की है बात!

-शैलेन्द्र उपाध्याय 





विश्व भारती
शत शत वंदन
माथे का ताज
हिमगिरी पर्वत
पैर पखारे
नर्मदा सतलज
पावन भूमि
रज सदा पूजित
नारी का मान
है देश का सम्मान
देवों की भूमि
संस्कारों से पूरित
धर्मों की रक्षा
सर्व धर्म समान
वेदों की गाथा
वीरों का बलिदान
शौर्य की गाथा
जन मानस गाता
शीश झुकाता
आजाद कहलाती
धरा पावनी
जन जन हर्षाता
तिरंगा लहराता

~रमा वर्मा~



अर्थ न जाना
निरंकुशता रही
आजादी माना
देश के लिए जीयें
यह भी ठाना ?
गैर को अपनाना,
जरूरी न था,
स्वभक्ति, स्वार्थ बस,
नित्य बहाना,
सिमटी देशभक्ति,
प्रयत्न नाना,
भ्रष्टाचार की आग
सपने ख़ाक,
रस्मों की अदायगी
झंडा वंदन
स्वतंत्रता दिवस
लबादा है या बाना |

~ फणीन्द्र कुमार भगत


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