Saturday, 19 July 2014

काव्य सृजन (प्रतियोगिता विशेष)

दोहा छंद (पुरस्कृत रचना)

खिली कुमुदिनी देख कर,हुआ चाँद बेचैन|
रातों के आगोश में,मिलती उनके नैन|| १.

कनक सरीखी भोर है,श्वेत रंग सी रात|

मंगलमय वातावरण,बरसाती सौगात|| २.
©कुमुद नयना 



दोहा छंद (पुरस्कृत रचना) 

तपती धरती पर गिरी, यूँ औचक जलधार|
बिना भूमिका ज्यों करे, वक्ता व्यक्त विचार|| १.

पहली बारिश में हुई, दुल्हनिया लाचार|
इत बूँदन के वार हैं, उत मच्छर की मार|| २.
©डॉ गोपाल राजगोपाल 



दोहा छंद (सराहनीय रचना)

बादल गरजे जोर से ,घिरी घटा घनघोर|
रास रचाने दामिनी ,चली गगन की ओर|| १.

पेड़ों को मत काटिये ,करिये इनसे प्यार|
जीवन हैं ये जगत का ,कुदरत का उपहार|| २.
©भारती जैन 


दोहा छंद (सराहनीय रचना)

सावन की रुत आ गई, रिमझिम पड़े फुहार|
भीगे मन आँगन सखी.....भीगे पी का प्यार|| १.

मधुवन सुरभित हो उठा, बरसे नभ से प्रीत|
झूम-झूम सब गा रहे ,मिल कर पावस गीत|| २.
©रमा वर्मा


दोहा छंद (सराहनीय रचना)

रंगों से अम्बर सजा, सजा धरा का रूप|
आँगन उपवन वाटिका, लगते बहुत अनूप||

सावन आया झूम के, रिमझिम गिरे फुहार|
बागों में झूले सजे, गूँज रही मल्हार||
©वैशाली चतुर्वेदी 

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