चौपाई (पुरस्कृत रचना)
उषा
हुई नभ छाई लाली।
कोकिल
कूक रही मतवाली।।
पुष्पवाटिका
महकी सारी।
फैली
परिमल प्यारी प्यारी।।
©ओम
प्रकाश मेघवाल
चौपाई (पुरस्कृत रचना)
नभ
पर किसने रंग भरें है|
कितने सारे दीप जड़ें है||
सूरज चंदा चमक रहे
है|
गगन धरा भी दमक रहे है||
©रेखा जोशी
चौपाई (सराहनीय रचना)
भीगा-भीगा मौसम आया।
सबके मन को है ये भाया।।
सबके मन को है ये भाया।।
सोंधी-सोंधी खुशबू आए।
पहली बूँद धरा जब पाए।।
पहली बूँद धरा जब पाए।।
©पूनम सिन्हा


haardik badhai sabhi rachnakaron ko
ReplyDelete