स्वयं
पर तुमको करना होगा सर्वप्रथम विश्वास |
सपना
बड़ा सजाना होगा, अपना उसे बनाना होगा,
मंज़िल
को कदम बढ़ाकर ही लिख पाओगे इतिहास,
ओस
चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |
मन
में इक विश्वास जगाना, पाने की फिर प्यास बढ़ाना,
फिर
बिना रुके आगे बढ़ जाना, छू जाना अनंत आकाश,
ओस
चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |
तूफानों
से टकराना तुम, सागर को पी जाना तुम,
झंझावातों
की चूल हिला दो, छोड़ के भोग-विलास,
ओस
चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |
दीपशिखा
से जलते जाना, आंधी से भी ना घबराना,
वैभव
में आया अहंकार तो, बनोगे काल का ग्रास ,
ओस
चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |
©अरुण
आशरी, जीन्द (हरियाणा)
बहुत सुन्दर भावों से सजी रचना के सम्मान के लिए बधाई ..
ReplyDeleteलोकोक्ति पर आधारित बहुत उम्दा सृजन ! हार्दिक बधाई आपको Arun Ashri जी :)
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