Thursday, 10 July 2014

"अभिव्यक्ति --- मन से कलम तक" में पुरस्कृत रचना

ओस चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास,
स्वयं पर तुमको करना होगा सर्वप्रथम विश्वास |
सपना बड़ा सजाना होगा, अपना उसे बनाना होगा,
मंज़िल को कदम बढ़ाकर ही लिख पाओगे इतिहास,
ओस चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |
मन में इक विश्वास जगाना, पाने की फिर प्यास बढ़ाना,
फिर बिना रुके आगे बढ़ जाना, छू जाना अनंत आकाश,
ओस चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |
तूफानों से टकराना तुम, सागर को पी जाना तुम,
झंझावातों की चूल हिला दोछोड़ के भोग-विलास,
ओस चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |
दीपशिखा से जलते जानाआंधी से भी ना घबराना,
वैभव में आया अहंकार तो, बनोगे काल का ग्रास ,
ओस चाटने से तो भैया, मिटती नहीं है प्यास |

©अरुण आशरी, जीन्द (हरियाणा)

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर भावों से सजी रचना के सम्मान के लिए बधाई ..

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  2. लोकोक्ति पर आधारित बहुत उम्दा सृजन ! हार्दिक बधाई आपको Arun Ashri जी :)

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