Friday, 18 July 2014

काव्य सृजन (प्रतियोगिता विशेष)

चौपाई (पुरस्कृत रचना)

उषा हुई नभ छाई लाली।
कोकिल कूक रही मतवाली।।
पुष्पवाटिका महकी सारी।
फैली परिमल प्यारी प्यारी।।
©ओम प्रकाश मेघवाल 

चौपाई (पुरस्कृत रचना)

नभ पर किसने रंग भरें है
कितने सारे दीप जड़ें है||

सूरज चंदा चमक रहे है| 
गगन धरा भी दमक रहे है||
©रेखा जोशी 

चौपाई (सराहनीय रचना)

भीगा-भीगा मौसम आया। 
सबके मन को है ये भाया।।
सोंधी-सोंधी खुशबू आए। 
पहली बूँद धरा जब पाए।।

 ©पूनम सिन्हा 

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