दिल
उसी को चाहता है बारहा ,
राह
में जो छोड़ता है बारहा !
क्या
वफ़ा के जानता है मायने ,
बेवफा
जो बोलता है बारहा !
तीरगी
हर सूं बसा के याद में ,
पल
ख़ुशी के खोजता है बारहा !
दाग
चेहरे के उसे दिखते नहीं ,
आइनों
को कोसता है बारहा !
पास
था वो तो नज़र आया नहीं ,
अब
मधुर क्या सोचता है बारहा !
प्रह्लाद रॉय चंदेल “मधुर"
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