राग
हो तुम गीत भी तुम
प्राण
भी हो प्रीत भी तुम
मन-मंदिर
में बसते हो,
हार
भी हो जीत भी तुम | (1)
सिसकियों
के साज पर जो वेदना के गीत गाते
बह
गये आँसू कि जिनके यूँ नयन घट रीत जाते
पौंछकर
आँसू अगर तुम पीर उनकी हर सके तो,
जश्न
उनके भी मनें जो प्यार से तुम बोल आते | (2)
-प्रमिला
आर्य
हम
बतायें तो बतायें क्या नजाकत आपकी
मुस्कुराहट
तो लगे जैसे कयामत आपकी
यार
तू इकरार कर मेरी मुहब्बत का अभी
जान
ले लेगी किसी दिन ये शराफत आपकी !! (1)
-आलोक मित्तल
जमाने
में मुहब्बत की न कोई चीज सानी है
नियामत
है मुहब्बत ख़ास आलिम* की जुबानी है
नजीरे-इश्क
देखी है किताबों में हमो-तुमनें,
नहीं
मरती मुहब्बत सिर्फ अपना जिस्म फानी है। (1)
मुहब्बत
के बिना अपनी अधूरी जिन्दगानी है
यही
कहता कबीरा और मीराँ की जुबानी है
लिखा
है सूर ने ऐसा यही तुलसी बयाँ करते,
मुहब्बत
के बिना पर ही किताबे-आसमानी है। (2)
*आलिम-
विद्वान, बुद्धिमान
-ओम
प्रकाश मेघवंशी
दूसरों
के लिये जिये जाना तू
जख्म
को प्यार से सिये जाना तू
प्यार
ही प्यार हो जमाने में अब,
रौशनी
प्यार की किये जाना तू | (1)
-रमा
वर्मा
भ्रमर
कोई मुहब्बत का कुसुम जब चूम जाता है
कुसुम
संग आप भी मस्ती नशे में झूम जाता है
नशा
क्या है मुहब्बत का ये आशिक ही समझते हैं ,
जवानी
चीज क्या इसमें बुढ़ापा घूम जाता है |(1)
जिन्दगी
एक उलझन है कहीं धोखा कहीं ठोकर
कोई
हंस कर के जीता है कोई जीता है रो रोकर
यहाँ
पल-पल बदलती हैं परिभाषाएं रिश्तों की ,
प्रेम
उगता ये निश्चित है देखिये प्रेम बीज बो कर | (2)
-अनन्त आलोक ‘अनन्त’
नम
हवाओं की दस्तक सुना रहा है कोई
गीली
आँखों में सपने सजा रहा है कोई
ह्रदय
वेदना शूल सी उठती है रह रह कर
कदाचित
स्मृतियों को जगा रहा है कोई | (1)
दोस्तों
पे मुहब्बत लुटाई है मैंने
होंठों
पे तबस्सुम सजाई है मैंने
फूट
फूट के रोया है बादल जब
नफरत
की दीवार गिराई है मैंने | (2)
-डॉ
एम.एल.गुप्ता "निनाद"
न
वो इसरार करते हैं न वो इनकार करते हैं।
नज़र
उनकी बताती है वो हमसे प्यार करते हैं।
यह
दिल की बात है इसको समझना पड़ता है दिल से ,
मुहब्बत
करने वाले लोग कब इज़हार करते हैं। (1)
वो
एक इंसान को मैं दोस्तों जितना भुलाता हूँ।
उसे
उतना ही अपने दिल के मैं नजदीक पाता हूँ।
अजब
है आग उल्फत की "अनिल" हमने ये पाया है
ये
उतनी बढ़ती जाती है इसे जितना बुझाता हूँ। (2)
-अनिल
रस्तोगी
अंगारों
पे चल के सदा प्यार किया जाता है
अधरों
पे मुहब्बत का श्रृंगार किया जाता है
कुछ
खबर ही नहीं रहती. दिल को जहां की,
जब
समर्पित स्पर्श स्वीकार किया जाता है | (1)
मुहब्बत
में दिल क्यों ...बेकरार रहता है
हर
लम्हा क्यों दिल को इंतज़ार रहता है
नींदें
भी रूठ जाती हैं मुहब्बत में अक्सर,
पलकों
में बस ख़्वाबों का संसार रहता है | (2)
-सुशील
सरना
फिर
किसी ने प्यार से हमको पुकारा है |
नेह
के दीपक जला रस्ता बुहारा है
कह
रही है रातरानी प्रेम के किस्से,
बादलों
की ओट से चंदा निहारा है | (1)
खून
से हमने चमन अपना संवारा है
त्याग,तप,कुर्बानियां देकर निखारा है
आन
की खातिर निछावर शीश फिर करने,
सिर
कफ़न बांधे चला आया दुलारा है | (2)
-ब्रह्मदेव
शर्मा
आफ़तों
का शुमार है दुनिया
एक
मुश्ते-ग़ुबार* है दुनिया
है
मुहब्बत-से चाहे नफरत-से,
दर्द
-का- कारोबार है दुनिया | (1)
* एक मुट्ठी राख
दिले-महबूब
से निकली हिकारत हो नहीं सकती
कयामत
हो- इबादत हो- इनायत हो नहीं सकती
यही
कुछ सोच कर कासिर रहे दिल लेने देने के,
मुहब्बत
तो मुहब्बत है तिजारत हो नहीं सकती | (2)
-अशोक
साहनी
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