विधाता
छंद पर आधारित एक भक्ति गीत
मापनी
--1222 1222 1222 1222
किसे
कहते है सच्ची मित्रता तुमको बताते है |
सुदामा
और कान्हा का मिलन तुमको दिखाते है |
सुदामा
चल पड़ा देखो उसे कान्हा बुलाते है |
विचारों
के नये तूफ़ान उसको आ सताते है |
कभी
सोचे कि ये होगा कभी सोचे कि वो होगा,
उधर
मन मन उसे यूँ देख कान्हा मुस्कुरातें है |
सुदामा
सोचता क्या आज देगा वो कन्हैया को,
दिया
बीवी का वो सत्तू सलीके से छिपाते है |
किसे
कहते है-----
गुजारा
साथ कान्हा के करे है याद वह बचपन |
कभी
देखे फ़टी अपनी लँगोटी और अपना तन |
कदम
रोके कभी देखो कभी आगे बढ़ाता है,
मगर
उससे छिपा क्या हैं पढ़े है जो सभी का मन |
कभी
माखन चुराते थे कभी गैया चराते थे,
सभी
किस्से पुराने आज उसको याद आते है |
किसे
कहते है –
बड़ी
दिल में लिए हलचल सुदामा आज आते है |
उसी
का हाल कान्हा आज रुक्मण से बताते है |
तभी
सेवक बताते है सुदामा आ गए कान्हा,
सभी
कुछ छोड़ कान्हा दौड़ नंगे पाँव जाते है |
दिखाकर
आइना सबको ये कैसा खेल रच डाला,
कन्हैया
पाँव धोकर दूर पीड़ा को भगाते है |
किसे
कहते है ----
बड़ी
हैरान है रुक्मण भला ये कौन आते है |
तड़प
जिस मित्र की कान्हा गले लगकर मिटाते है |
लगे
उसको कि कान्हा आज पागल हो गये शायद,
सुदामा
पर कन्हैया आज लोकों को लुटाते हैं |
कन्हैया
तीन मुट्ठी अन्न पर ही बिक गए यारों,
दिखा
माया सभी को मित्र की कीमत बताते है |
किसे
कहते है ----
~~~(मनोज "मानव")~~

सम्मानित मंच का रचना को प्रकाशित करने के लिए हार्दिक आभार
ReplyDeleteसम्मानित मंच का रचना को प्रकाशित करने के लिए हार्दिक आभार
ReplyDeletebahut khoooob ................bahut bahut mubarak ho janaab
ReplyDeleteदोस्ती का एक उत्कृष्ट उदाहरण ... कृष्ण - सुदामा के प्रकरण का बखूबी बयान ... दिली मुबारकबाद कबूल करें.
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