Tuesday, 8 September 2015

“अभिव्यक्ति-मन से कलम तक” मनोज मानव जी की पुरस्कृत रचना


विधाता छंद पर आधारित एक भक्ति गीत
मापनी --1222 1222 1222 1222

किसे कहते है सच्ची मित्रता तुमको बताते है |
सुदामा और कान्हा का मिलन तुमको दिखाते है |

सुदामा चल पड़ा देखो उसे कान्हा बुलाते है |
विचारों के नये तूफ़ान उसको आ सताते है |
कभी सोचे कि ये होगा कभी सोचे कि वो होगा,
उधर मन मन उसे यूँ देख कान्हा मुस्कुरातें है |
सुदामा सोचता क्या आज देगा वो कन्हैया को,
दिया बीवी का वो सत्तू सलीके से छिपाते है |
किसे कहते है-----

गुजारा साथ कान्हा के करे है याद वह बचपन |
कभी देखे फ़टी अपनी लँगोटी और अपना तन |
कदम रोके कभी देखो कभी आगे बढ़ाता है,
मगर उससे छिपा क्या हैं पढ़े है जो सभी का मन |
कभी माखन चुराते थे कभी गैया चराते थे,
सभी किस्से पुराने आज उसको याद आते है |
किसे कहते है –

बड़ी दिल में लिए हलचल सुदामा आज आते है |
उसी का हाल कान्हा आज रुक्मण से बताते है |
तभी सेवक बताते है सुदामा आ गए कान्हा,
सभी कुछ छोड़ कान्हा दौड़ नंगे पाँव जाते है |
दिखाकर आइना सबको ये कैसा खेल रच डाला,
कन्हैया पाँव धोकर दूर पीड़ा को भगाते है |
किसे कहते है ----

बड़ी हैरान है रुक्मण भला ये कौन आते है |
तड़प जिस मित्र की कान्हा गले लगकर मिटाते है |
लगे उसको कि कान्हा आज पागल हो गये शायद,
सुदामा पर कन्हैया आज लोकों को लुटाते हैं |
कन्हैया तीन मुट्ठी अन्न पर ही बिक गए यारों,
दिखा माया सभी को मित्र की कीमत बताते है |
किसे कहते है ----

~~~(मनोज "मानव")~~

4 comments:

  1. सम्मानित मंच का रचना को प्रकाशित करने के लिए हार्दिक आभार

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  2. सम्मानित मंच का रचना को प्रकाशित करने के लिए हार्दिक आभार

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  3. bahut khoooob ................bahut bahut mubarak ho janaab

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  4. दोस्ती का एक उत्कृष्ट उदाहरण ... कृष्ण - सुदामा के प्रकरण का बखूबी बयान ... दिली मुबारकबाद कबूल करें.

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