Wednesday, 30 September 2015

मुक्तक दिवस - 118 प्रीति शर्मा जी का पुरस्कृत मुक्तक


आसमाँ तुझको झुका के,आज मैं दिखलाऊँगा।

हौंसलों से सीढियाँ मैं,तुझ तलक ले आऊँगा।

दे सके जितनी चुनौती,तू मुझे दे ले अभी,

आज माथे पर तेरेअपनी फतह लिख जाऊँगा।


-प्रीति शर्मा 

1 comment:

  1. बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं

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