Tuesday, 29 September 2015

"मुक्तक दिवस 117" वीरेंद्र बेताब जी का पुरस्कृत मुक्तक


कमी छोड़ दी क्यूँ , बनाने में मुझको |

ख़ता क्या थी मेरी , ऐ ख़ालिक जहाँ के |

भुगतना ही है , अब तो कर्मों को अपने,

मुझे हौंसला दे , ऐ मालिक जहाँ के |

-विरेन्द्र बेताब


2 comments:

  1. हौसला बनाये रखिए, आप को मंजिल मिलेगी राधेश्याम| बन्धु

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  2. हौसला बनाये रखिए, आप को मंजिल मिलेगी राधेश्याम| बन्धु

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