"मुक्तक दिवस - 121" डॉ.दिनेश चन्द्र भट्ट जी का पुरस्कृत मुक्तक
पापियों का देख लो,गुलशन हरा है आज क्यों?
सत्जनो का आह से,जीवन भरा है आज क्यों?
न्याय तेरा है यही तो,ये नहीं मंजूर हमको
ईश होने पर,नहीं उतरा खरा है आज क्यों?
-डॉ.दिनेश चंद्र भट्ट,गौचर(चमोली)उत्तराखंड
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