Tuesday, 3 November 2015

"मुक्तक दिवस - 123" राम आशीष यादव जी का पुरस्कृत मुक्तक

पेट तब तक ही भरेगा जब तलक खेती रहेगी |
चाहे कितना भी बदल लो देह ये मिट्टी रहेगी |
तब तलक ही है सलामत प्यार की खुशबू जहाँ में,
सबके दिल में और नज़र में शीर्ष पर बेटी रहेगी |
-डॉ राम आशीष यादव.

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