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शुभमस्तु !
Wednesday, 14 October 2015
"मुक्तक दिवस- 120" कुलदीप ब्रजवासी जी का पुरस्कृत मुक्तक
बराबर काम करता है मगर तनखा नहीं पूरी | कुशल मंगल अनुज घर हो करें यह सोच मजदूरी | जरूरत है जिसे शिक्षा की उसके हाथ में ईंटें, जताती बेबसी को ये रहीं जो भी हैं मजबूरी | - कुलदीप ब्रजवासी
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