Monday, 7 July 2014

नमामि माँ शारदे !

श्रद्धा सुमन अर्पण करूँ स्वीकार कर माँ शारदे|
निज सुत समझ मुझ पे कृपा इक बार कर माँ शारदे|

दिन रात तेरी अर्चना मैं साधना करता रहूँ,
संताप सारे त्याग कर आराधना करता रहूँ,
देकर अभय वरदान अब भव पार कर माँ शारदे|
निज सुत समझ ......

तू ज्ञान का भंडार है तू शक्ति का संचार है,
नवशक्ति की सम्पन्नता से सज रहा दरबार है,
दे कर जगह चरणों में अब उद्धार कर माँ शारदे|
निज सुत समझ ......

कब से भटकता फिर रहा संसार के जंजाल में,
लाचार बेबस सा फिरूं कब तक यहाँ इस हाल में,
मुझ नासमझ नादान पर उपकार कर माँ शारदे|
निज सुत समझ ......

©Dk Nagaich Roshan

6 comments:

  1. माँ शारदे की बहुत खूबसूरत व भावपूर्ण वंदना से ब्लॉग का शुभारम्भ हुआ ....आपको हार्दिक बधाई Dk Nagaich Roshan जी _/\_

    ReplyDelete
    Replies
    1. उत्साहवर्धन और आपकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार विनीता सुराणा जी

      Delete
  2. वाह,सरस्वती ज्ञान की देवी का वरद हस्त आपके सर पर है साक्षात् प्रतीत होता है,सुन्दर वंदना

    ReplyDelete
    Replies
    1. उत्साहवर्धन और आपकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार ,दादा, सुरेश चौधरी जी ..

      Delete
  3. Umdaaaa AuR Pakeeza ShuRuaaT .......bahut Mubarak Ho

    ReplyDelete
  4. उम्दा एवं सुशोभनीय रचना,, जय माँ शारदे,,

    ReplyDelete